WhatsApp पर प्यार
शुरुआत एक ग़लत नंबर से हुई। "हैप्पी बर्थडे दीदी!" — ये मैसेज आया रात 12 बजे। निखिल ने रिप्लाई किया — "भैया, ये ग़लत नंबर है। मैं दीदी नहीं हूँ।" "ओह सॉरी! 😅 पर हैप्पी बर्थडे तो ले लो, चाहे किसी की भी हो!" निखिल हँसा। रिप्लाई किया — "थैंक्यू। पर मेरा बर्थडे अगले महीने है।" "तो अगले महीने फिर विश करूँगी। नोट कर लिया। 📝" उसका नाम काजल था। पुणे में रहती थी। निखिल लखनऊ में। 800 किलोमीटर की दूरी। वो ग़लत नंबर कभी डिलीट नहीं हुआ। रोज़ मैसेज — सुबह "गुड मॉर्निंग ☀️" से शुरू, रात "गुड नाइट 🌙" पर ख़त्म। बीच में — मीम्स, गाने, खाने की फ़ोटोज़, ऑफ़िस की शिकायतें, सपनों की बातें। एक महीने बाद, सच में निखिल का बर्थडे आया। रात 12 बजे फ़ोन बजा। "हैप्पी बर्थडे!" काजल की आवाज़ — पहली बार सुनी। मीठी, हँसती हुई। निखिल बोल नहीं पाया कुछ देर। फिर बोला — "शुक्रिया। ये सबसे अच्छा बर्थडे विश है।" "सबसे अच्छा? अभी तो गिफ़्ट नहीं दिया!" "तुम्हारी आवाज़ सुन ली — यही गिफ़्ट है।" काजल चुप हो गई। फिर धीमे से बोली — "तुम बहुत अच्छे हो, निखिल।" तीन महीने और बीते। वीडियो कॉल्स शुरू हुईं। फिर एक दिन काजल ने कहा — "मिलना है मुझे।" निखिल ने अगले हफ़्ते पुणे की टिकट बुक कर ली। पुणे स्टेशन। काजल खड़ी थी — पीली कुर्ती, बालों में क्लिप, और एक बोर्ड जिस पर लिखा था: "ग़लत नंबर, सही इंसान। ❤️" निखिल ने वो बोर्ड आज भी संभालकर रखा है। दोनों की शादी हो चुकी है। और हर साल, उस ग़लत नंबर वाले मैसेज की तारीख़ पर — दोनों एक-दूसरे को "हैप्पी बर्थडे दीदी" भेजते हैं। क्योंकि कभी-कभी, ज़िंदगी की सबसे सही चीज़ — सबसे ग़लत तरीक़े से शुरू होती है।