आधी रात का फ़ोन
2008। Nokia 1100। एक missed call। उस ज़माने में missed call का मतलब था — "मैं तुम्हें याद कर रहा हूँ।" शिवानी और राज — दसवीं class के दोस्त। दोस्त इसलिए क्योंकि "I like you" कहने की हिम्मत किसी में नहीं थी। राज ने शिवानी को number दिया — कागज़ पर लिखकर, class में चुपके से। "Call mat karna. Sirf missed call dena. Ghar waale daant-te hain." पहली missed call — रात 10 बजे। शिवानी ने दी, राज समझ गया — "Good night." दो missed calls — "Kuch baat karni hai." तीन missed calls — "Bahut miss kar rahi hoon." ये code सिर्फ़ दोनों को आता था। एक दिन राज ने हिम्मत की। रात 12 बजे — actual call। Phone एक बार ring हुआ। शिवानी ने उठाया — धीमी आवाज़ में, रज़ाई में छुपकर। "Hello?" "Hi." दोनों की पहली बात phone पर। 45 मिनट — फुसफुसाते हुए, हँसते हुए, heart beats गिनते हुए। "तुम्हें पता है मैं तुमसे—" राज ने कहा। "हाँ, मुझे पता है," शिवानी ने काटा। "तो?" "तो — 3 missed calls मैंने इसीलिए नहीं दीं कि मुझे बात करनी थी। मैंने इसलिए दीं—" Phone cut हो गया। Balance ख़त्म। अगले दिन school में, शिवानी ने राज की copy में एक चिट रखी: "3 missed calls इसलिए — I like you too, बुद्धू। ❤️" राज ने वो चिट अपने wallet में रखी। 18 साल हो गए। Wallet बदले, चिट नहीं बदली। आज दोनों की शादी हो चुकी है — एक-दूसरे से। दो बच्चे हैं। iPhones हैं दोनों के पास। पर हर anniversary पर, राज पुराना Nokia निकालता है (हाँ, अभी भी रखा है), और शिवानी को 3 missed calls देता है। शिवानी हँसती है, आँखों में आँसू, और कहती है — "अभी भी बुद्धू हो।" पर दोनों जानते हैं — कुछ चीज़ें कभी नहीं बदलतीं। और सच्चा प्यार — उनमें से एक है।