मोहब्बत की राहों में
शादी के 25 साल बाद भी वो रोज़ सुबह मेरे लिए चाय बनाती है। मैं कहता हूँ, 'रहने दो, मैं बना लूँगा।' वो कहती है, 'तुम बनाओगे तो चाय नहीं, प्रयोग होगा।' यही तो प्यार है — 25 साल बाद भी वही छेड़छाड़, वही हँसी, वही गर्माहट। प्यार grand gestures में नहीं, इन छोटी-छोटी बातों में छुपा होता है। --- बारिश की उस शाम को जब मैंने पहली बार उसे देखा, तो लगा जैसे वक़्त थम गया हो। वो कॉफ़ी शॉप के कोने में बैठी थी, किताब पढ़ रही थी। उसकी आँखों में एक अजीब सी गहराई थी जो मुझे खींच रही थी। मैंने हिम्मत जुटाई और उसकी टेबल पर जा बैठा। 'Excuse me, यह सीट ख़ाली है?' उसने मुस्कुराते हुए कहा, 'अब नहीं।' और इसी एक पल ने मेरी पूरी ज़िन्दगी बदल दी।