एक तरफ़ा इश्क़
उसकी चिट्ठी आज भी मेरे पास है। पीली पड़ चुकी है, स्याही धुंधली हो गई है, पर हर लफ़्ज़ आज भी दिल में ताज़ा है। 'तुम्हारे बिना सूरज तो निकलता है, पर रोशनी नहीं होती। तुम्हारे बिना बारिश तो होती है, पर भीगने का मन नहीं करता।' कितना आसान था उसका प्यार, कितना सच्चा। काश मैंने उस वक़्त उसकी क़द्र की होती। --- बारिश की उस शाम को जब मैंने पहली बार उसे देखा, तो लगा जैसे वक़्त थम गया हो। वो कॉफ़ी शॉप के कोने में बैठी थी, किताब पढ़ रही थी। उसकी आँखों में एक अजीब सी गहराई थी जो मुझे खींच रही थी। मैंने हिम्मत जुटाई और उसकी टेबल पर जा बैठा। 'Excuse me, यह सीट ख़ाली है?' उसने मुस्कुराते हुए कहा, 'अब नहीं।' और इसी एक पल ने मेरी पूरी ज़िन्दगी बदल दी।