तुम्हारे बिना — पाँच ग़ज़लें
— एक — तुम्हारे जाने के बाद मैंने सीखा, कि अकेलापन सिर्फ़ एक शब्द नहीं — एक मौसम है, जो हर वक़्त रहता है। — दो — चाय ठंडी हो गई है मेज़ पर, तुम्हारे लिए रखी थी — आदत से। अब कौन कहेगा — "बहुत गर्म है, ज़रा ठंडी होने दो"? — तीन — तुम्हारी ख़ुशबू अभी भी है तकिये पर, मैंने cover नहीं बदला — डरता हूँ कि ख़ुशबू चली गई तो सच में चली जाओगी। — चार — सबसे बड़ा झूठ यह नहीं कि "मैं ठीक हूँ" — सबसे बड़ा झूठ यह है कि "मैंने move on कर लिया।" — पाँच — तुमसे बस एक सवाल है — जब तुम जा रही थी, तो पीछे मुड़कर देखा या नहीं? क्योंकि मैं खड़ा था। अभी भी खड़ा हूँ। उसी जगह। उसी उम्मीद में। कि शायद तुम मुड़ोगी।