Hostel Room 304 की कहानी
JNU। Ganga Hostel। Room 304 और 306 — आमने-सामने। अंजलि Room 304 में रहती थी। Political Science, second year। दीवार पर Che Guevara का poster, table पर Chomsky की किताबें, और speakers से हमेशा Indian Ocean बजता। समीर Room 306 में। Economics। दीवार ख़ाली, table साफ़, और earphones में हमेशा Kishore Kumar। दोनों बिल्कुल उल्टे थे। पहली मुलाक़ात laundry room में हुई — दोनों के कपड़े एक ही machine में मिल गए। "ये मेरी kurta है," अंजलि ने कहा। "और ये मेरा shirt," समीर ने कहा, अंजलि की लाल कुरती पकड़े हुए। दोनों हँसे। Coffee पर बात हुई। फिर रोज़ बात होने लगी। अंजलि protest में जाती, समीर library में। अंजलि dhaba की चाय पीती, समीर CCD की coffee। अंजलि debate करती, समीर सुनता। "तुम कभी argue क्यों नहीं करते?" अंजलि ने एक रात पूछा, mess के बाहर बैठे हुए। "क्योंकि तुम्हें argue करते देखना ज़्यादा interesting है।" Semester exams। अंजलि का paper अगले दिन था और notes ग़ायब। रात 2 बजे Room 306 का दरवाज़ा खटखटाया। समीर ने दरवाज़ा खोला, आँखें मलते हुए। अंजलि रो रही थी। बिना कुछ कहे, समीर ने अपना chair खींचा, table पर अपने notes रखे, और coffee बनाई। पूरी रात पढ़ाया। सुबह 6 बजे, exam जाते हुए, अंजलि ने पीछे मुड़कर देखा — समीर दरवाज़े पर खड़ा था, thumbs up दे रहा था। Paper अच्छा गया। Final year में, एक शाम, दोनों hostel की छत पर बैठे थे। अंजलि ने कहा — "तुम मुझे पसंद करते हो ना?" समीर चुप रहा। "बोलो।" "तुम अभी argue करोगी?" "शायद।" "तो हाँ। बहुत पसंद करता हूँ। पहले दिन से। जब तुमने मेरी shirt पकड़ी थी laundry में।" अंजलि ने argue नहीं किया। बस उसके कंधे पर सिर रख दिया। आज दोनों Delhi में रहते हैं। अंजलि journalist है, समीर economist। अभी भी argue करते हैं — dinner पर, politics पर, music पर। पर सोने से पहले हमेशा कहते हैं — "Good night, Room 304/306."