मेरी जान को — एक प्रेम कविता
मैं तुम्हें वो सब कहना चाहता हूँ जो कभी कह नहीं पाता, जो गले में अटक जाता है जब तुम सामने होती हो। मैं कहना चाहता हूँ कि जब तुम हँसती हो तो मुझे लगता है दुनिया की सारी ख़ूबसूरती तुम्हारे चेहरे पर सिमट आई है। कि जब तुम उदास होती हो तो मेरा दिल इतना भारी हो जाता है जैसे सारा ग़म मेरा अपना हो। कि तुम्हारे बिना सुबह सिर्फ़ सुबह है, शाम सिर्फ़ शाम, चाँद सिर्फ़ चाँद — पर तुम्हारे साथ सब कुछ जादू है। मैं कहना चाहता हूँ कि तुम सिर्फ़ ख़ूबसूरत नहीं हो — तुम मेरी ताक़त हो, मेरा सुकून हो, मेरा घर हो। हर दिन तुम्हारे साथ एक तोहफ़ा है जो ज़िंदगी ने दिया है। तुम मेरी जान हो। ये बात मैं रोज़ कहता हूँ, पर आज लिख रहा हूँ — ताकि जब कभी शक हो तो ये पन्ना खोल लेना और जान लेना — मेरा प्यार कम नहीं हुआ। बस बढ़ता गया है। हर दिन। हर पल।