प्रिय अंशु,
ये ख़त मैं कभी भेज नहीं पाऊँगा। पर लिखना ज़रूरी था।
याद है वो दिन? दसवीं की परीक्षा का आखिरी दिन। सब लोग खुश थे कि छुट्टियाँ शुरू हो रहीं हैं। पर मैं उदास था — क्योंकि छुट्टियाँ मतलब तुम्हें रोज़ न देख पाना।
तुम स्कूल के गेट पर खड़ी थीं। सफ़ेद सलवार कमीज़, बालों में चमेली का फूल। मैंन...