ग्यारहवीं क्लास। नया स्कूल। नया शहर। कोई दोस्त नहीं।
रिया ने क्लासरूम में एंटर किया। सारी सीटें भरी थीं — सिवाय एक के। आख़िरी बेंच, खिड़की के पास।
वहाँ पहले से एक लड़का बैठा था। सिर झुकाए, कॉपी में कुछ बना रहा था।
"यहाँ बैठ सकती हूँ?" रिया ने पूछा।
उसने सिर उठाया। भूरी आँखें, बिखरे बाल। "हाँ," ब...